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इत्तेफाक की किताब -2 (pyar ki kahani in Hindi)

दोस्तो यह कहानी इतेफाक की किताब से शुरू हुई । लेकिन अमीर –गरीब की दिवारो के कारण प्यार अधुरा (love story in hindi) रह जाता है । इतेफाक की कहानी के इस भाग में आप जानेंगे कि कैसे वह प्यार फिर से एक होता है और यह अमीर – गरीब की दिवारे भी टूट जाती है ।
-(अभि और माया दोनो की सगाई हो जाती है और एक महिने बाद उनकी शादी तय कर दी जाती है । माया पुजा के प्यार के डर से अभि को लंदन ले जाती है । )

यह इत्तेफाक प्यार की कहानी की अधुरी कहानी है। जिसका अंतिम भाग निम्न है।

इस प्यार की कहानी का प्रथम भाग

प्यार का दर्द

Latest interesting love story in Hindi – इतेफाक की किताब part – 2

माया- अभि हमें यहां पर आये हुए काफी समय हो गये है । लेकिन एक महिने से कुछ भी नहीं बोल रहे हो । क्या तुम अब हमेशा के लिए ऐसे ही रहोगे । और पुजा तुम्हारे लिए नहीं बनी है । उसे अपने दिल से निकाल दो अभि ।
अभि- नहीं माया, मेरा दिल उसे कभी भी नहीं भुला सकता है । क्योंकी ये हवा मुझे हर समय पुजा के प्यार का अहसास कराता है । और जब मेरे गीत कानो में पड़ते है तो सिर्फ पुजा के प्यार की ही याद दिलाते है । ये किताबो के पेज मुझे मेरे प्यार की शुरूआत की याद दिलाते है ।और निंद में मुझे सिर्फ पुजा के ही सपने आते है जहाँ मुझे पुजा का प्यार आज भी पुकार रहा है । इसलिए में उसे इस जिंदगी में तो कभी भी नहीं भुला सकता हूं ।
माया- अभि उसके प्यार में ऐसा क्या है ?
अभि- माया पुजा की आंखो में वह सच्चा प्यार झलका है । और उसे देखने से लगता है कि में जन्नत की परियो को देख रहा हूं । माया, पुजा की सोच अन्य लड़कीयो से काफी अलग है । कोई भी लड़की अपने प्यार की कुर्बानी नहीं देती है । लेकिन पुजा ने खुद अपने प्यार को दूर कर दिया और पुजा के कहने पर ही मेने तुझसे सगाई की थी।

माया- क्या? तुने मुझसे सगाई पुजा के कहने पर की थी । नहीं अभि उसने सिर्फ तुझे फसाने के लिए कहा होगा । मैं कहती हूं कि वह तुम्हे अब तक भुल चुकी होगी ।
अभि- माया, ऐसा कभी भी नहीं होगा ।
माया- आज मैं भारत जा रही हूं । क्योंकी हमारी MSc की पढाई पुरी हो चुकी है । इसलिए मैं सर्टिफिकेट लेने जा रही हूं । क्या तुम मेसे साथ चलोगे ।
अभि- नहीं, तुम चली जाओ । मैं भारत गया तो मुझे पुजा की याद आऐगी ।
माया- ठिक है ।
-(माया अपना और अभि का सर्टिफिकेट लेने के लिए कॉलेज जाती है जहां पुजा काम करती है ।
माया अगले दिन कॉलेज में पहुंच जाती है और माया सर्टिफिकेट ले लेती है ।)
माया- (सोचती है ) क्यों न एक बार लाइब्रेरी जाकर आऊं । पता तो चले की उस किताब में कैसी चिट्ठि है ।
(माया उस इतेफाक की किताब को खोलती है । तो उसमें देखती है कि उसमें बहुत सारी चिठ्ठियां रखी थी । और उसमे आज भी पुजा अपने और अभि के प्यार की चिठ्ठिया लिख रही थी । उन्हे देख कर माया को अहसास हुआ कि पुजा का प्यार सच्चा है । )
माया- (सोचती है ) मुझे लगता कि अभि और पुजा के प्यार को मिलाने में मुझे मदद करनी चाहिए । उनका प्यार अमर है । और अगर मैने अभि से शादी भी कर ली तो मुझे कभी भी अभि का प्यार नहीं मिल सकेगा ।
(माया अभि के पिता महेश के घर जाती है । और उन्हे समझाती है ।)

माया- अंकल अभि की शादी पुजा से करवा दिजिए । क्योंकि अभि बिना पुजा के प्यार के एक जिंदा लास की तरह रह जाएगा । और अंकल अगर मेरी शादी अभि से हुई तो भी अभि का प्यार मुझे नहीं मिलेगा । अभि पुजा के प्यार के लिए पागल है । और पुजा भी अभि से आज भी प्यार करती है । ये देखिए वो सभी चिठ्ठियां जो अभि के जाने के बाद भी पुजा आज तक लिख रही है ।
महेश- हां माया, मुझे यकीन हो गया कि पुजा का प्यार इन पैसो के ढेर से अधिक बड़ा है । मैंने अभि को अलग करके भुल कर दी। चलो अभि को वापिस ले आये।
(महेश और अभि की मां माया के साथ लंदन जाते है । )
महेश- बेटा अभि, मुझे माफ कर देना । मैं तुम्हारे और पुजा के प्यार को नहीं समझ पाया । मैं जानता था कि पुजा ने ही तुम्हारे साथ भागने से मना किया था और माता- पिता के प्यार के लिए अपना प्यार छोड़ दिया । लेकिन फिर भी मैं पुजा ऐसे सच्चे प्यार को समझ नहीं पाया । और बेटा मैं तुम्हे इस तरह बेजान नहीं देख सकता हूं ।
लेकिन बेटा अब मेरे आंखो से नोटो की पट्टी हट गयी है । चलो बेटा पुजा के पास जाते है और तुम्हारी शादी करते है । क्योंकि आज भी पुजा तुमसे उतना ही प्यार करती है ।
अभि- क्या, पुजा आज भी मुझे प्यार करती है ।
माया- हां अभि, ये लो तुम्हारे प्यार की किताब।
अभि- चलो पापा जल्दी चलो।

प्यार में माता-पिता का सहयोग– प्यार की तलाश

Latest interesting love story in Hindi – इतेफाक की किताब part – 2

-(दोस्तो अभि जैसे ही भारत पहुंचता है तो वह सबसे पहले पुजा के घर जाता है लेकिन पुजा के घर पर ताला लगा होता है । अभि पड़ोसियों से भी पुंछता है लेकिन किसी को भी पुजा के परिवार का पता नहीं होता है । अभि कॉलेज में भी जाकर पुंछता है कि)
अभि- नमस्ते सर, पुजा कहां गयी है, क्या आपको पता है?
सर- अभि, क्या वहीं पुजा जिसे तुने अपना सबसे प्यारा गिटार दे दिया। और पुरे कॉलेज के सामने अपने प्यार का ऐलान किया।

अभि- हां, सर । लेकिन पुजा कहां है?
सर- बेटा, पुजा दस दिन पहले यहां पर आयी थी । और उसने नौकरी छोड़ी दी। और यहां से कही दूर चली गयी ।
अभि- माया अब क्या करेंगे? हमने पुजा को सभी जगह ढुंढ लिया लेकिन उसका कहीं भी पता नहीं चला।
माया- अब तो कोई इतेफाक ही हो सकता है ।
-(अभि माया को पुरा दिन ढुंढता है लेकिन उसका पता नहीं मिल पाता है । तभी अभि का दोस्त सुरेश रात को आता है और अभि से गले लगता है। )
सुरेश- अभि मुझे पता था कि तुम पुजा के लिए वापिस जरूर आओगे। जब तुमने अपना सबसे प्यारा गिटार पुजा को दे दिया तब मुझे यकिन हो गया कि तुम्हारा सच्चा प्यार है और तुम इसे किसी भी हालत में नहीं छोडोगे ।लेकिन तुम माया से सगाई करके लंदन चले गये ।

परन्तु मुझे पुरा यकिन था कि तुम वापिस जरूर आऔगे । इसलिए मैने पुजा के परिवार का पुरा पता लगा कर रखा था। और पुजा अभि इलाहबाद में है। उसकी नर्स के रूप में नौकरी भी लग गयी है । शायद इसलिए वे यहां से चले गये ।
अभि- थैंक यू यार, चलो पुजा को लेकर आते है ।
-(अभि, माया, सुरेश और उसका परिवार पुजा के घर पर पहुंचते है तो देखते है कि पुजा का घर सजा हुआ था। अभि घर में घुसता है ।)
अभि- हेलो, घर पर कोई है ?
कांता- हां आयी।
आप सब कौन है?
अभि- मेरा नाम अभि है । पुजा कहां पर है।
कांता- ओ, तो तुम ही हो अभि। मैं पुजा की मामी हूं । बेचारी पुजा रोज तुम्हारे गिटार को देख कर तुम्हे याद करती थी । और उसे कही न कहीं यकीन था कि तुम जरूर आएगे। सच्च में बेटा तुम्हारा प्यार सच्चा है। लेकिन बेटा..
अभि- लेकिन क्या? और पुजा कहां पर है।

प्यार की दूसरी शादी

कांता- अभि, पुजा की आज शादी है । और पुरा परिवार शादी के लिए इंद्रपर्स्थ गार्डन गया है। बेटा जल्दी जाओ, शादी के लिए 10 मिनट ही रहे है । और बेटा पुजा आज भी तुम्हारा इंतजार कर रही है। जल्दी जाओ।
महेश- जल्दी जाओ बेटा। और यह स्कुटर लेकर जाओ । हम तुम्हारे पीछे आ रहे है ।
-(अभि स्कुटर की पुरी स्पीड के साथ जाता है । लेकिन सामने ट्रक आता है और अभि को जोर से उड़ा देता है । लेकिन अभि फिर भी उठने की कोशिश करता है । परन्तु वह उठ नही पाता है । तभी पीछे माया, सुरेश और महेश आते है । )
महेश- अभि..(जोर से चिलाते हुए) ये क्या हुआ ? शायद तुम्हारा प्यार अधुरा ही रहेगा।
अभि- नहीं पापा मैं जाऊंगा।
महेश- बेटा मुझे माफ करना बेटा। लेकिन तुम्हारे सिर से पर बहुत ज्यादा चोट लगी है । मैं तुम्हे वहां पर नहीं ले जा सकता हूं। हम अभी होस्पीटल जायेंगे।

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माया, अभि को उठाओ और कार में ले चलो। (अभि के सिर से बहुत ज्यादा खुन निकल जाता है । डॉक्टर भी उसके बचना मुश्कील कह देते है ।)
-(इंद्प्रस्थ गार्डन जहां पुजा की शादी हो रही है ।)
पुजा- अभि तुम कहां हो । हे भगवान कोई इतेफाक ही कर दे लेकिन मुझे अभि से मिला दे, प्लीज। नही तो मैं अभि के बिना जिंदा नहीं रह सकती हूं।
लौहार(पुजा का पिता)- नहीं बेटा ऐसा बिल्कुल भी मत करना। और बेटा मुझे माफ कर देना। मैं जानता हूं कि उस रात अभि तुझे भगाने आया था । और तुने हमारे प्यार के लिए अपने प्यार की कुर्बानी दे दी ।

कास मेंने उसी समय तुम्हारी शादी की हां कर दी होती तो शायद ये दिन नहीं आता । मुझे माफ कर देना बेटा। लेकिन मैं अब कुछ कर भी नहीं सकता । क्योंकी अभि लंदन में है और वो यहां पर कभी भी नहीं आ सकता है । बेटा अब तुम्हे यही शादी करनी होगी। चलो बेटा। (पुजा के पिता रोते हुए पुजा को मंडप में लाते है और पुजा मंडप में बेठ जाती है। पंडित यज्ञ शुरू कर देता है। और शादी शुरू हो जाती है। )
पंडित- अब नर और वधु शादी के फेरे लेंगे।
-(पुजा जैसे ही खड़ी होती है तो पुजा के मुह से खुन निकलता है और पुजा बेहोश होने लगती है। पुरा मंडप हैरान हो जाता है।)
लौहार- बेटी, ये तुने क्या किया ? तुने जहर खा लिया।

प्यार में जहर पिया

पुजा- पापा मुझे माफ कर देना। लेकिन में आपके दिल में जरूर रहूंगी।
-(और पुजा यह कह कर, मर जाती है । उसकी सांसे रूक जाती है । लेकिन पुजा फिर से आंखे खोलती है और देखती है कि उसके हाथ में वही इतेफाक की किताब थी। )
पुजा- अभि, अभि तुम आ गये। (और यह कह कर पुजा फिर से बेहोश हो जाती है । लेकिन यह किताब सुरेश लेकर आती है। )
सुरेश- अंकल जी, जल्दी से चलिए, पुजा को होस्पीटल ले जाते है । अभि भी वहीं पर है।
लौहार- क्या? लेकिन कैसे?
सुरेश- अंकल जी अभी बताने का समय नहीं है। चलो जल्दी करो।

-(दोस्तो दोनो ही बच जाते है । और जब उठते है तो दोनो का हाथ एक – दुसरे के हाथ मे होता है। और उसके सामने दोनो परिवार भी एक साथ खड़ा था। इस तरह एक इतेफाक की किताब से प्यार शुरू होता है और उसी से खत्म हो जाती है। दोस्तो प्यार का मतलब अपने परिवार को साथ लेकर चलना भी होता है । इसलिए दोस्तो जिंदगी में प्यार जरूर करे लेकिन अपने परिवार को खुश रख कर शादी करे। )

अंतिम शब्द

हमें उमीद है कि प्यार की कहानी से आपको प्यार का मतलब समझ आ गया होगा।

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