Tue. Nov 29th, 2022

नमस्ते मित्रों, आज की कहानी laxmi bomb movie पर आधारीत है। क्योंकि बहुत सारे लोगों की “laxmi bomb movie story in hindi” पर quires आ रही हैं। इस कहानी में हम अक्षय कुमाऱ की पूरी कहानी का विस्तृत और रोमांचक वर्णन करेंगे।

Laxmi bomb movie story cast or actors

  • अक्षय कुमार- आसिफ का रोल अक्षय ने निभाया है।
  • कियारा आडवाणी- कियारा ने आसिफ की बीवी के रूप में रश्मि अहमद का रोल अदा किया है।
  • शरद केलकर- इन्होने लक्ष्मी का अद्भूद अभिनय किया है।
  • अश्विनी कलसेकर- अश्विनी राजपुत का रोल
  • मुस्कान खुबचंदानी- पलक का रोल
  • तरुण अरोरा- विधायक गिरजा का रोल
  • आयेशा रज़ा- रत्ना राजपुत का रोल
  • विनीता जोशी ठक्कर- अंजली के रूप मे
  • अध्विक महाजन- अंगद के रूप में
  • मीर सरवार – अब्दुल चाचा का रोल
  • राजेश दुबे- बाबा का रोल
  • जैस्पर- शाहनवा पी.
  • राजेश शर्मा- सचिन राजपुत
  • इसके अलावा तुषार कपूर, ऐलेना रोक्साना, मनु ऋषि, वैभव चौधरी आदि।

About laxmi bomb movie story

laxmi bomb movie story in Hindi

लक्ष्मी बम्ब मूवी को 9 नवम्बर 2020 में रिलीज किया गया था। इस फिल्म के मुख्य किरदार अक्षय कुमार, कियारा आडवाणी, आश्विनी कलसेकर, राजेश शर्मा, आयशा रजा, मनु ऋषि और शरद केलकर।

इस मूवी का डायरेक्शन राघव लॉरेंस ने किया हैं। जिन्होंने कंचना की horror movie में अच्छा रोल किया था। हालांकि मूवी के टाइटल को लेकर श्री राजपूत करणी सेना ने कानूनी नोटिस भी जारी किया था। लेकिन डायरेक्टर राघव ने कहा कि लक्ष्मी का करिदार एक धमाकेदार है। इसलिए इस मूवी का नाम लक्ष्मी बॉम्ब रखा गया है।

Laxmmi bomb movie  की कहानी Horror और हंसीमजाक की हैं। कहानी देखने और पढ़ने में बहुत interesting है। इस कहानी का मुख्य रूप से ट्रांसजेडर के अधिकार पर आधारीत हैं। यहां अक्षय कुमार ट्रांसजेडर को न्याय दिलाता है।

कहानी की शुरूआत

यह मूवी Kanchana 2 movie की रिमेक हिन्दी मूवी है। आसिफ (अक्षय कुमार) और रश्मि (कियारा) की love marriage होती है। वे भागकर शादी करते है। इसलिए रश्मि अपने मां-बाप से दूर रहती है। लेकिन आसिफ चाहता था कि रश्मि अपने परिवार के साथ रहे।

एक दिन रश्मि की मां अपी ऐनिवर्सी पर उन्हे घर पर बुलाती है। आसिफ और रश्मि निमंत्रण पर रश्मि के घर पर जाते है। आसिफ ने दर्ढ निश्चिय किया कि वह इस बार रश्मि के परिवार को मना लेगा।

शैतानी आत्मा का प्रेवश

इस तरह कहानी की शूरूआत हो जाती है। एक दिन अक्षय बच्चों के साथ खेल मैदान में जाते है। और जब वे क्रिकेट की लकड़ी जमीन में डालते है तो वह लकड़ी एक लाश के शरीर में घुसती है। औऱ वहां का पूरा वातावरण भयानक बन जाता है।

अक्षय बच्चों के साथ पुन: लौट आता है। लेकिन लकड़ियों पर खुन लगा होता है। जिसे आसिफ एक गमले के उपर धोता है। और अगले दिन वह उस गमले की पत्ती की चाय बनाकर पी लेता है। जिससे ट्रांसजेंडर की आत्मा आसिफ में आ जाती है।

इसके बाद मूवी बहुत ही ज्यादा कॉमेडी और हंसते हुए चलती है। आसिफ बहुत ही नये और धमाकेदार अंदाज में एक्टींग करता है। लेकिन वह कॉमेडी के साथ ट्रांसजेंडर का बदला भी लेता रहता हैं।

आसिफ सभी गुंडो को हास्य और भयानक दोनों तरिके से मारता है। मूवी में आसिफ ट्रांसजेंडर की तरह लड़कियों का व्यवहार करता हैं। जिसे देखकर रश्मि का परिवार डर जाता है। वह एक मूश्लिम बाबा के पास भी जाते है। और उन्हे पता चलता है कि आसिफ के अंदर वास्तव में एक भूतियां आत्मा है.

Read more:

दादा की घंटी की कहानी | bachhon ke liye achhi kahaniyan

baccho ki hindi kahaniya | 5 पांच अच्छी कहानीयां दिल छुं जाए

कुछ दिनों तक वे डरकर जिंदगी जीते है। लेकिन इस समय मूवी का सबसे ज्यादा मजा मिलता है। आसिफ का व्यवहार बहुत ही ज्यादा हास्य प्रकार का होता है। और वह अपने परिवार को भी हास्य तरिके से परेशान करता है।

कुछ दिनों बाद मूश्लिम बाबा आसिफ के घर पर आते है। और आसिफ के अंदर की भूतियां आत्मा (horror ghost) को नियंत्रित करता है। और आत्मा को अपनी कहानी बताने के लिए कहता है। यहां से कहानी का interval  शुरू होता है।

Laxxmi bomb movies interval

भूतिया आत्मा (ट्रांसजेंडर) अपने ऊपर हुए अत्याचार की कहानी बताती है। उसे बचपन में ही अपनी परिवार से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया जाता है। क्योंकि वह सामान्य लड़को की तरह नही था। लेकिन यह भगवान की देनी थी। उसमें वह भी कुछ नहीं कर सकता था।

घर से निकलने के बाद वह मूश्लिम अब्दुल चाचा के साथ रहती है। अब्दुल चाचा सभी की मदद करता था। उसके घर पर एक पागल बच्चा भी रहता था। लक्ष्मी अपना पूरा जीवन उनके हवाले कर देती है। लक्ष्मी के पास एक और ट्रांसजेंडर बच्चा आता है। जिसे उसके परिवार बाहर निकाल देते है।

लक्ष्मी उसे अपनी बच्ची (दीदी) की तरह पालती है। और उसे अच्छी पढ़ाई भी करवाती है। लक्ष्मी अपने बच्ची के लिए मेहनत से कमाये पैसों से एक जमीन खरिदती है। ताकि उस पर एक हॉस्पीटल बन सके। औऱ उसकी बच्ची का सपना पूरा हो सके।

लेकिन वहां के MLM गिरजा ने उस पर कब्जा कर लेता है। ऐसे में लक्ष्मी आग बबुला होकर उसके घर पर पहुंचती है और उसके सभी रक्षको को मारती है। लक्ष्मी का यह रूप देखने योग्य था। लेकिन गिरजा और उसकी बीवी उसे धोके से मार डालते है। और उसके बाबा और पागल भाई को भी मार देते है।

उनकी लाश को उसी के जमीन के अंदर दबा दिया जाता है। इस कारण क्रिकेट की लकड़ियों के खुन के जरीये लक्ष्मी की आत्मा आसिफ में आती है।

कहानी को पूरा सुनने के बाद लक्ष्मी की आत्मा को बोतल में कैद कर लेता है। और उसे समूंद्र में फैंक देता है। बाबा आसिफ के हाथ पर एक धागा बांधता है ताकि वह आत्मा वापिस आसिफ के शरीर में प्रवेश न कर सके।

आसिफ ने दिया सहयोग

लेकिन आसिफ को पता चलता है कि लक्ष्मी के साथ अन्याय हुआ है और उसके गुनहेगार अभी भी जिंदा है। इसलिए आसिफ अपने हाथ के धाके को तोड़ देता है औऱ लक्ष्मी के बदले में सहयोग करता है।

लक्ष्मी अपने बदले के लिए मुख्य गुंडे को खत्म करने के लिए जाती है। लक्ष्मी बम्ब मूवी का अंतिम दृश्य बहुत ही आकर्षक होता है। वह सभी को गुंडो को बहुत नये अंदाज में मारती है। कहानी का अंत आसिफ की वजह से होता है।

अंतत: लक्ष्मी की आत्मा को शांति मिल जाती है। साथ उसके पागल और बाबा को भी आजादी मिल जाती है। लक्ष्मी का सपना था कि वह अपनी बच्ची के सपनों का सच करेगी। और इसी सपने को आसिफ पुर करता है।

आसिफ लक्ष्मी की बच्ची (दीदी) को पुन: जमीन दिलवाता है। और हॉस्पीटल भी बनवाता है। इस तरह आसिफ ट्रांसजेंडर की मदद करता है। और उन्हे उनके अधिकार फिर से लौटाता है। और दीदी (लक्ष्मी की मुहबोली बेटी) इलेक्शन में खड़ी होती है।

इस laxmi bomb movie story का उद्देश्य किन्नर के साथ हो रहे लैंगिक भेदभाव और अधिकारों को समान दिलाना है।

लक्ष्मी बॉम्ब मूवी का डायरेक्टर कौन है?

राघव लौरेंस

लक्ष्म बॉम्ब का नाम क्यों बदला गया?

इस मूवी के टाइटल को लेकर राजपूत करणी सेना ने कानूनी नोटिस जारी किया था। इसलिए लक्ष्मी बॉम्ब मूवी का टाइटल विवेदात्मक रहा। लेकिन राघव लॉरेंस डायरेक्टर ने बताया कि यह नाम फिल्म किरदार लक्ष्मी की धमाकेदार प्रदर्शन के लिए प्रस्तुत किया गया है। और राघव ने इसके पीछे की एक कहानी भी बताई है।

लक्ष्मी बॉम्ब मूवी किन्नर पर क्यों बनाई गयी?

राघन लौरेंस ने बताया कि वे एक ट्रस्ट चलाते थे। तब उनके पास कुछ किन्नर आये थे। और उन्होने लैंगिक भेदभाव के बारे में बताया। तब राघव को लगा कि इसे एक मूवी के द्वारा लोगों के सामने लाने की जरूरत है। और लोगों के मन से लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना आवश्यकता है।

लक्ष्मी मूवी कब रिलीज हुई?

9 नवम्बर 2020 को।

अंतिम शब्द

कहानी ट्रांसजेंडर पर हो रहे लैंगिक भेदभाव और उनके अधिकार पर आधारित है। सच में कहानी शिक्षाप्रद है। इस कहानी से आपको बहुत शिक्षा मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *